Its not too long that I've started writing poem. Just six months or so.....I really want people to read my poems and give their honest responses...what you feel about my writing and what else I need to incorporate in my writings...your field of interest...frens I am waiting for your response eagerly....:)
Wednesday, 6 April 2016
Thursday, 17 March 2016
जाये तो जाये कैसे
जाये तो
जाये कैसे
रंग
बिरंगी होली आई
रिश्तेदार और दोस्त है बहुत दूर
उनसे
रंग खेलने की इच्छा हुई
उनके पास जाये तो जाये कैसे
ट्रेनों
में रिजर्वेशन नहीं
किसी तरह पहुंच भी जाये
तो
रिश्तों नातो में प्रेम कहाँ से लाए
इस लिए रंग-गुलाल चढ़ता नहीं
हवाओ
में उमंग नहीं
मिठाई में मिठास नहीं
चेहरे
खिले नहीं,खुशियाँ बटी नहीं
दोस्तों- रिश्तो में उतना
प्रेम नहीं
जाये तो
जाये कैसे Friday, 19 February 2016
हुश्न पहाड़ो का
हुश्न पहाड़ो का
हुश्न पहाड़ो का
मौसम है जाड़ों का
मौसम है स्वेटर पहनने का
बर्फ यहाँ जब पड़ती है
जैसे पृथ्वी सफ़ेद चादर से लिपटी है
जल और थल में
अवनी और अम्बर तल में
स्वच्छ चाँदनी फैली है
बड़ा ही बिहंगम दृश्य है
यह देख मन मयूर नाच उठता है
हर समय यही देखने का जी करता है
इस अनमोल शीत ऋतु का
बार बार अभिनन्दन
हुश्न पहाड़ो का
मौसम है जाड़ों का
मौसम है स्वेटर पहनने का
बर्फ यहाँ जब पड़ती है
जैसे पृथ्वी सफ़ेद चादर से लिपटी है
जल और थल में
अवनी और अम्बर तल में
स्वच्छ चाँदनी फैली है
बड़ा ही बिहंगम दृश्य है
यह देख मन मयूर नाच उठता है
हर समय यही देखने का जी करता है
इस अनमोल शीत ऋतु का
बार बार अभिनन्दन
देशद्रोहियों सुनो
देशद्रोहियों सुनो
अगर तुम में थोड़ी भी शर्म है
तो देश द्रोही नारे बंद करो
अगर तिरंगे का अपमान करोगे
अफजल की तरह मारे जाओगे
देश द्रोहियों जिस थाली में कहते हो
उसी में छेद करते हो
तुम्हे जीने का कोई हक़ नहीं
तुम फांसी पर लटका दिए जाओगे
अगर तुम में थोड़ी भी शर्म है
तो देश द्रोही नारे बंद करो
अगर तिरंगे का अपमान करोगे
अफजल की तरह मारे जाओगे
देश द्रोहियों जिस थाली में कहते हो
उसी में छेद करते हो
तुम्हे जीने का कोई हक़ नहीं
तुम फांसी पर लटका दिए जाओगे
Wednesday, 6 January 2016
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
शब्द एक देश से दूसरे देश बिना रोक टोक जाती
शब्द सात समंदर से आते है
इन्ही शब्दों से एक रचना बन जाती
जो कविता कहलाती है
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
बिना रोक टोक आती जाती है
शब्द ही है जो सदियों तक यूँ ही चलते
बिना किसी रुकावट
बिना किसी झिझक के
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
शब्द एक ठंडी हवा की तरह है
जो सबको सराबोर कर देती है
शब्द जात-पात नहीं देखती
वो सबसे जुड़ जाती है
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
Tuesday, 29 December 2015
नारी तुम सबला हो
नारी तुम सबला हो
नारी तुम अबला नहींतुम सबला हो
तुम्ही हो सृष्टि की रचियता
तुम ही ने इस घर को स्वर्ग बनाया
नारी तुम अपने अस्तित्व को पहचानो
तुम ही शक्ति तुम ही चंडी
असुरो का रक्त बहाकर
तुमने ही इतिहास रचा है
इस सच्चाई का स्मरण करो
नारी तुम अबला नहीं
तुम सबला हो
तुम ही माता तुम ही पत्नी
तुम ही पुत्री तुम्ही बहना हो
तुम्ही ने अनेक रिश्तो का नाम दिया है
तुम खुशियों का एक विशाल प्रकाश पुंज हो
नारी तुम अबला नहीं
तुम सबला हो
Thursday, 3 December 2015
किताबे नहीं तो कुछ भी नहीं
किताबे नहीं तो कुछ भी नहीं
किताबे नहीं तो कुछ भी नहीं
किताब न हो तो कैसे हो बुद्धि का विकास
कैसे हो तार्किक विकास
कैसे सीखें जिंदगी जीना
किताबे नहीं तो कुछ भी नहीं
किताबे ले जाती हैं वास्तविक दुनिया के करीब
मोबाइल पे हो जाते निर्भर तो कैसे हो शब्दों का ज्ञान
किताबो के प्रति दिलचस्पी न हो तो
कैसे हो व्यक्तित्व का विकास
किताब सिखाती तरक्की की रह
किताब न हो तो कैसे हो कल्पना, बौद्धिक विकास
किताबे नहीं तो कुछ भी नहीं
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