Wednesday, 13 April 2016

आयुर्वेद में टमाटर

आयुर्वेद में टमाटर

हरे लाल लाल टमाटर
     इससे कोई दूसरा  फल और सब्ज़ी
नहीं ले सकता टक्कर
     जितना सेब में है गुण
उसी बराबर इसमें गुण
     जब भी खरीदने जाये टमाटर
लाल लाल ही लाये टमाटर
     क्यूंकि इसमें बीटा केरोटीन,लिकोपिन
की मात्रा होती है भरपूर
     सलाड खाए या जूस सूप पिए
यह हर रूप में आपको रखें तंदरुस्त
     हृदय रोग और मधुमेह
सभी रोगो से रखे दूर
     आयरन विटामिन सी से भरपूर
इससे कोई दूसरा  फल और सब्ज़ी
     नहीं ले सकता टक्कर
हरे लाल लाल टमाटर

योग बदल देगा जीवन

योग बदल देगा जीवन

हमको इतना है विश्वास
     अगर लोगो ने अपनाया योग
दिन उनका होगा सुन्हेरा
     जीवन उनका बदल जाएगा
लोगो ने जीवन शैली ही दिया बदल
     रात में देर से खाना, देर से सोना
खूब होता मदिरा का सेवन
     सुबह की प्रथम किरण को गए है भूल
टहलना भी तो गए है भूल
     इसीलिए किसी को शुगर
किसी को जोड़ो का है दर्द
     किसी का पाचन तंत्र है बिगड़ा
सब कुछ हो गया उल्टा पुल्टा
     लेकिन हमको इतना है विश्वास
अगर लोगो ने अपनाया योग
     उनका जीवन बदल जाएगा
सभी रोगो से मिलेगा छुटकारा
     योग से होता मस्तिष्क मजबूत
मासपेशियों को कर देता मजबूत
     हमको इतना है विश्वास
अगर लोगो ने अपनाया योग
     जीवन उनका बदल जाएगा
फिर दिन उनका होगा सुन्हेरा

Thursday, 17 March 2016

जाये तो जाये कैसे

जाये तो जाये कैसे

रंग बिरंगी होली आई
     रिश्तेदार और दोस्त है बहुत दूर
उनसे रंग खेलने की इच्छा हुई
     उनके पास जाये तो जाये कैसे
ट्रेनों में रिजर्वेशन नहीं
     किसी तरह पहुंच भी जाये
तो रिश्तों नातो में प्रेम कहाँ से लाए
     इस लिए रंग-गुलाल चढ़ता नहीं
हवाओ में उमंग नहीं
     मिठाई में मिठास नहीं
चेहरे खिले नहीं,खुशियाँ बटी नहीं
      दोस्तों- रिश्तो में उतना प्रेम नहीं
जाये तो जाये कैसे                                             

Friday, 19 February 2016

हुश्न पहाड़ो का

हुश्न पहाड़ो का 
हुश्न पहाड़ो का 
मौसम है जाड़ों का 
मौसम है स्वेटर पहनने का 
बर्फ यहाँ जब पड़ती है 
जैसे पृथ्वी सफ़ेद चादर से लिपटी है
जल और थल में
अवनी और अम्बर तल में
स्वच्छ चाँदनी फैली है
बड़ा ही बिहंगम दृश्य है
यह देख मन मयूर नाच उठता है
हर समय यही देखने का जी करता है
इस अनमोल शीत ऋतु का
बार बार अभिनन्दन

देशद्रोहियों सुनो

देशद्रोहियों सुनो
अगर तुम में थोड़ी भी शर्म है
तो देश द्रोही नारे बंद करो
अगर तिरंगे का अपमान करोगे
अफजल की तरह मारे जाओगे 
देश द्रोहियों जिस थाली में कहते हो
उसी में छेद करते हो
तुम्हे जीने का कोई हक़ नहीं
तुम फांसी पर लटका दिए जाओगे

Wednesday, 6 January 2016

शब्दों की कोई सरहद नहीं होती


शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
शब्द एक देश से दूसरे देश बिना रोक टोक जाती
शब्द सात समंदर से आते है
इन्ही शब्दों से एक रचना बन जाती
जो कविता कहलाती है
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
बिना रोक टोक आती जाती है
शब्द ही है जो सदियों तक यूँ ही चलते
बिना किसी रुकावट
बिना किसी झिझक के
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती
शब्द एक ठंडी हवा  की तरह है
जो सबको सराबोर कर  देती है
शब्द जात-पात नहीं देखती
वो सबसे जुड़ जाती है
शब्दों की कोई सरहद नहीं होती