Monday, 21 September 2015

चुनावी शंखनाद

चुनावी शंखनाद

बज गया चुनावी शंखनाद
     सभी नेता हुए सजग
करने लगे चहल पहल
     करने लगे जनता से गुहार
वोट देने आना है जरूर
     करने लगे जनता से मनुहार
अगर चुनना है अच्छा प्रतिनिधि
      लोकतांत्रिक गण राज्य मे
जनता अपने मताधिकार का
      करे सही प्रयोग
सही नेता का चुनाव कर
      सभी वर्गों का करे कल्याण
पनपने न दे भ्रष्टाचार
      और महंगाई अत्याचार
बज गया चुनावी शंखनाद

Sunday, 20 September 2015

ईश्वर की महिमा

ईश्वर की महिमा

जिसने सूरज चाँद बनाया
जिसने तारो को चमकाया
जिसने चिड़ियों को चहकाया
जिसने फूलो को महकाया
जिसने कल कल करती,
नदियों को बहना सिखाया
जिसने पर्वतो को शीश उठा कर ,
खड़े रहना सिखाया
जिसने बच्चो के मन को निश्छल बनाया
जिसने सारा जगत बनाया
हम उस ईश्वर के गुण गाये
उसको अपने स्वछ मन में बिठाए
उसे प्रेम से  शीश झुकाए

किताबे नही तो कुछ भी नही

किताबे नही तो कुछ भी नही


किताबे नही तो कुछ भी नही,
किताब न हो तो कैसे हो बुद्धि का विकास
कैसे हो तार्किक विकास
कैसे सीखे जिंदगी जीना
किताबे नही तो कुछ भी नही
किताबे ले जाती है वास्तविक दुनिया के करीब
मोबाइल पर हो जाते निर्भर
तो कैसे हो शब्दों के ज्ञान
किताबो के प्रति दिलचस्पी न हो तो
कैसे हो व्यक्तित्व का विकास
क़िताब सीखाती तरक्की की राह
किताब न हो तो कैसे हो कल्पना,बौद्धिक विकास
किताबे नही तो कुछ भी नही

हमारे प्यारे नेता नरेंद्र मोदी जी

हमारे प्यारे नेता नरेंद्र मोदी जी  
हमारे प्यारे नेता नरेंद्र मोदी जी
रत्नों में सबसे अच्छा सफ़ेद मोती,
नेताओ में सबसे अच्छा नरेंद्र मोदी
उनका ललाट ऊँचा,
विचार आसमान से भी ऊँचा
आँखें आशाओ से भरी हुई,
मन मोहिनी छवि उनकी
ऐसे हैं हमारे नेता नरेंद्र मोदी
सब का साथ सबका विकास ,
उनका यही है नारा
स्वछता का पाठ उन्होंने पढ़ाया
गंगा मइया के परम पुजारी
उनके राज्य में बढ़ती खुशहाली
ऐसे हैं हमारे नेता नरेंद्र मोदी

Thursday, 3 September 2015

इतने निर्दयी हो जाओगे

                          इतने निर्दयी हो  जाओगे 



हे : प्याज तुम इतने निर्दयी हो जाओगे,
      यह तो सपने में भी न सोचा था
एक महीने से तुम मेरी रसोई में न आओगे,
     ऐसा तो  मैंने सोचा ही न था
आज कल तो अच्छी अच्छी सब्जियों की,
       हेकड़ी मिटा दी तुमने
तुम केवल सब्ज़ी मंडी में नज़र आओगे,
      हे प्याज तुम इतने निर्दयी हो जाओगे
ये तो सपने में भी न सोचा था
     सब्ज़ी की इस रेस में तुम
सबको पीछे छोड़ गए
     हम यह नहीं कहते की
तुम पीछे रह जाओ
     लेकिन गरीब की थाली में तो
कभी कभी दिख जाओ
     त्योहार के मौसम में तो
रसोई में तुम झाँक लिया करो
      हे : प्याज तुम इतने निर्दयी हो जाओगे ,
ये तो सपने में भी न सोचा था

Saturday, 23 May 2015

कन्या भ्रूण हत्या अपराध हैं

लक्षी दुर्गा काली सरस्वती और सीता को पूजने वाले इस देश में निरंतर बढ़ रही कन्या  भ्रूण हत्या के चलते आज ममता और शक्ति का प्रतीक माने जाने वाली स्त्रियों का अस्तित्व ही गहरे संकट में हैं । लड़को की अपेक्षा लड़कियों की संख्या तेज़ी से गिरती जा रही है। पिछले एक दशक में १५ लाख कन्या भ्रूणों की हत्या हुई हैं ।

आइये आपको एक घटना से अवगत करा दे। रमेश और रचना (परिवर्तित नाम) की शादी को ४ वर्ष हो चुके है। दोनों पढ़े लिखे ऊँचे पदों पर कार्यरत हैं. उनकी पहली संतान एक कन्या हैं। मगर बेटे की चाह में रचाना  ३ बार गर्भपात करवा चुकी है। क्युकि तीन बार गर्भ में कन्या भ्रूण था। आश्चर्य की बात ये है की दोनों को अपने किये पर कोई पछतावा नहीं है।

इतने कानून बने है। सजा का प्रावधान भी हैं. फिर कैसे लोग इतनी आसानी से कन्या भ्रूण हत्याएं करवा लेते हैं। लाखों बेटियां संसार में आने से पहले ही मार दी जाती हैं। ये नहीं सोचते की अगर बेटी ही नहीं होगी तो पुरुष भी नहीं होगा। क्योकि किसी की पत्नी बनकर ही वो बेटे या बेटी को जन्म देती हैं। जन्म के बाद भी कन्याएं आशुरक्षित हैं।

यहाँ तक की कन्या को जन्म देने वाली माँ को भी बहुत कुछ सहना पड़ता हैं। हमारे देश में आम लोगों का कहना हैं की दहेज़ जैसी कुप्रथा के चलते लड़की का जनम दुखदायी मन जाता है। और लड़को को बुढ़ापे का सहारा मन जाता हैं। वंश बढ़ने की छह के चलते पुत्र प्राप्ति को आतुर हमारा समाज शायद जब तक होश में आये तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। 
बेटा जनने वाली स्त्रियां ही नहीं रहेंगी फिर कौन बढ़ाएगा इनका वंश ????

kalyugi murga